नमस्कार मित्रों
आज से हम भारत देश की कुछ समस्याओं के बारे में चर्चा करेंगे साथ ही उनका क्या समाधान ढूंढा जाए यह भी जानने की कोशिश करेंगे ।
यह एक सीरीज होगी प्रत्येक सीरीज में हम एक उपाय के बारे में जानेंगे । यहां यह स्पष्ट करना बहुत जरूरी है कि यह जो उपाय मैं बता रहा हूं यह मेरे व्यक्तिगत सोच का परिणाम है यह आवश्यक नहीं है कि इन्हें अमल में लाया जाए बस मेरी एक कोशिश है और व्यक्तिगत रूप से मेरा मानना है कि ऐसा किया जा सकता है ।यदि सरकारों में यह करने की इच्छा हो क्योंकि यह उपाय सरकार के सहयोग से ही लागू हो सकते हैं । आज से हम बेरोजगारी की बहुत ही संवेदनशील समस्या पर बात करेंगे ।
मुझे यह बताने की जरूरत ही नहीं है कि आप बेरोजगारी की समस्या से अनभिज्ञ नहीं है इसलिए हम यह चर्चा नहीं करेंगे कि बेरोजगारी क्या है यह चर्चा हम आए दिन सुनते हैं TV, न्यूज़ समाचार पत्र सभी जगह आए दिन इस समस्या के बारे में लेख छपते हैं और पता नहीं कितने लेख छप चुके हम आम जनता पढ़ते भी हैं लेकिन बेचारी आम जनता के हाथ में कुछ नहीं है सिवाय मूकदर्शक बनने के हम अपनी परेशानियों की कसमसाहट को मन ही मन छुपाते रहते हैं क्योंकि हम जानते हैं कि हमें सुनने वाला कोई नहीं है । सरकारें सत्ता के नशे में चूर रहती है इसलिए हम यह नहीं जानेंगे कि बेरोजगारी क्या है बस मैं सिर्फ लोगों को यह बताना चाहता हूं कि अगर सरकारी ईमानदारी से इन उपायों पर सोचें तो अवश्य ही बेरोजगारी की समस्या मैं यह तो नहीं कहूंगा कि 100 प्रतिशत नही, लेकिन मैं यह मानता हूं कि 60 से 70% बेरोजगारी की समस्या दूर हो सकती है ।
इस ब्लॉग के माध्यम से मैं आपसे भी यह उम्मीद करूंगा की इसे अधिक से अधिक शेयर करें ताकि अधिक से अधिक लोग इन उपायों के बारे में जाने तो आज से बेरोजगारी की सीरीज के अंतर्गत हम पहले उपाय के बारे में चर्चा करेंगे ।
क्योंकि मैं भी इस समस्या से पीड़ित रहा हूं मैं भी एक शिक्षित बेरोजगार था काफी डिग्रियां ली काफी सर्टिफिकेट लिए काफी कोर्स किए लेकिन इसके बावजूद नौकरी तो नहीं मिली इसलिए अभी मैं ब्लॉग और YouTube के माध्यम से ही मेरा जीविकोपार्जन होता है । मैं आपसे भी गुजारिश करता हूं कि आप भी यह काम अवश्य करें , हो सकता है आपके पास समय की कमी हो आप पार्ट टाइम से कर सकते हैं सिर्फ धनार्जन के लिए नहीं आप अपने विचारों को जनता के सामने रख सकते हैं तो चलिए शुरू करते हैं बेरोजगारी का उपाय नंबर - 1
मित्रों जैसा की मैंने बताया हम बेरोजगारी क्या है इस बारे में बात नहीं करेंगे और करने की आवश्यकता भी नहीं है क्योंकि लगभग पूरे देश के युवा इस समस्या से पीड़ित है तो यह क्या समस्या है इसको जानने से कुछ नहीं होगा इसका मूल उद्देश्य यह है कि इसे कैसे दूर किया जाए ।
मित्रों मेरा यह मानना है कि एक ट्रैफिक सिपाही को हम लेते हैं या हम यह कहे कि ट्रैफिक समस्या को लें, आए दिन आज कल हमें अखबार और न्यूज़ TV में होने वाले एक्सीडेंट के बारे में सुनने को मिलता है यह एक गंभीर समस्या बनती जा रही है जैसे जैसे विकास के नाम पर सड़कें चौड़ी होती जा रही है मार्बल की तरह चिकनी होती जा रही है वैसे वैसे ही दुर्घटनाओं का ग्राफ बढ़ता जा रहा है । सुविधाएं बढ़ी हैं पर सुरक्षा कम हुई है ।
सुविधा के साथ सुरक्षा भी जरूरी है तो ट्रैफिक समस्या से निपटने के लिए सरकारों को आवश्यकता होती है ट्रैफिक पुलिस कर्मियों की और यह बात हम बहुत अच्छी तरह जानते हैं की ट्रैफिक पुलिस की बहुत भारी कमी है हमारे देश में । आप एक शहर में जाएं तो गिने-चुने बड़े स्थानों और चौराहों पर हमें ट्रैफिक कर्मी मिल जाते हैं इसके अतिरिक्त छोटी गलियों छोटी सड़कों अंदरूनी कॉलोनियां चौराहे कई मोड़ , खतरनाक मोड़, कई डेंजर जोन ऐसी बहुत सी स्थितियां शहर में होती है सड़कों पर कि आए दिन वहां पर एक्सीडेंट होते हैं । इसके अतिरिक्त लोग विशेषकर युवा ट्रैफिक नियमों को तोड़ने में पीछे नहीं रहते यहां तक कि युवा तो आजकल महंगी मोटरसाइकिल खरीद कर ऐसे गाड़ी को दौड़ाते हैं जैसे प्रथम आकर उन्हें नोबेल पुरस्कार प्राप्त होगा ।
चलिए वह एक अलग समस्या है बात करते हैं समस्या के हल के बारे में मैं मेरा व्यक्तिगत राय यह है कि एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी के पास क्या योग्यताएं होती है कि वह ट्रैफिक को नियंत्रित करता है या यूं कहें कि एक व्यक्ति के पास ऐसी कौन सी योग्यताएं होनी चाहिए कि वह ट्रैफिक को नियंत्रित कर सके तो जहां तक मुझे ध्यान है ट्रैफिक नियमों की जानकारी जरूरी है इसके अतिरिक्त शरीर से ठीक-ठाक हो शरीर में या शारीरिक रूप से स्वस्थ हो तो यह काम कोई भी युवा आसानी से कर सकता है । मुझे नहीं लगता कि यहां पर कोई बहुत ही ज्यादा ट्रेनिंग की आवश्यकता है आप जो ट्रैफिक नियमों के या जिन्होंने ट्रेनिंग ली है आप उनको बड़े चौराहों पर महत्वपूर्ण जगहों पर आप उनको तैनात कर सकते हैं , परंतु छोटे चौराहे छोटी सड़कें गली मोहल्ले या शहर के अंदरूनी हिस्से या हमने देखा है कि बड़े शहरों के बड़े शहरों का बहुत विकास हो गया है तो बाहर के जो मोहल्ले हैं जो मुख्य शहर से दूर हो चुके हैं वहां पर भी ट्रैफिक की बड़ी समस्या है तो नौजवानों को कुछ ट्रेनिंग दे दी जाए और सरकार द्वारा उन्हें अधिकृत कर दिया जाए कि वे ट्रैफिक को नियंत्रित कर सकते हैं ट्रैफिक को कंट्रोल कर सकते हैं तो मुझे नहीं लगता कि इसमें सरकारों को कोई परेशानी होगी क्यों वह परेशानी इसलिए नहीं होगी कि सरकार को यह जरूरत नहीं है कि वे उनकी तनख्वाह या सैलरी दे ।
मैं यह कहता हूं कि एक युवा अगर एक चौराहे पर सुबह से शाम 8 घंटे की ड्यूटी करता है तो कम से कम 10 आदमी या 15 आदमी तो वह अवश्य ही ऐसे पकड़ सकता है जिन्होंने ट्रैफिक नियम को तोड़ा हो या कोई दुर्घटना की हो या किसी भी प्रकार से ट्रैफिक में व्यवधान उत्पन्न किया हो । तो इस प्रकार 10 आदमी भी अगर हम मान कर चलें और प्रत्येक से ₹200 भी लिए जाएं तो ₹2000 प्रतिदिन के एकत्र होते हैं जिसमें से उस नौजवान को सरकार अपने हिसाब से 500 रुपए या ₹600 या जो भी उन्हें सही लगे वह नौजवान को देखकर अतिरिक्त बचा पैसा सरकार अपने पास रखें इस प्रकार सरकार की अतिरिक्त आय भी होगी और वह कोई अवैध भी नहीं होगी क्योंकि वह एक तरह से अपराधियों से लिया गया पैसा है ।
तो उन्हें सिर्फ जुर्माने का अधिकार रहे और कितना जुर्माना वह इकट्ठा होगा उसमें से सरकार अपना हिसाब रखें और उस नौजवान को भी अपना हिस्सा दे । मैं यह नहीं कहता कि इतनी तनख्वा होनी चाहिए सरकार अपने विवेक से आज के समय के अनुसार उन्हें अच्छी तनख्वाह पर भी रख सकती है तो इसमें मुझे नहीं लगता कहीं पर भी कोई बड़ी समस्या सरकार के लिए है बल्कि इससे सरकार की समस्या हल ही हो जाएगी । आप उनको कुछ ट्रेनिंग दे उनको कुछ रेगुलेशन नियम वगैरा समझाएं और उन्हें वैध तरीके से उन्हें अलग-अलग स्थानों पर अप्पोइन्ट कर दे ।
तो मित्रों यह एक मेरी राय है मेरा व्यक्तिगत मत है । हो सकता है आप इस बात से सहमत ना हो परंतु मेरी एक प्रार्थना है कि आप एक बार इस पर विचार जरूर कीजिए । मुझे नहीं लगता कि इस नियम को लागू करने में सरकारों को कोई परेशानी होगी ।
क्योंकि इससे सरकार पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ रहा दूसरा सरकार को अतिरिक्त आय हो रही है तो सरकारों के लिए तो यह लाभ की बात है तीसरा जो पहले से अपॉइंट है जो ट्रैफिक पुलिसकर्मी उनको भी से कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि उनका स्थान अलग है इनका स्थान अलग रहेगा ।
तो बेरोजगारी की सीरीज में आज हमने एक उपाय के बारे में जाना उम्मीद है आपको यह ब्लॉग अच्छा लगेगा ।
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और एजुकेशन के लिए यदि आप उत्कृष्ट वीडियो देखना चाहते हैं तो हमारे youTube चैनल WHAT WHEN WHERE पर देख सकते हैं ।
अगले ब्लॉग में एक नए बेरोजगारी के निराकरण के उपाय के साथ हाजिर होंगे ।
हमारे साथ अपना कीमती समय देने के लिए आपका बहुत-बहुत आभार बहुत-बहुत धन्यवाद ।
आज से हम भारत देश की कुछ समस्याओं के बारे में चर्चा करेंगे साथ ही उनका क्या समाधान ढूंढा जाए यह भी जानने की कोशिश करेंगे ।
यह एक सीरीज होगी प्रत्येक सीरीज में हम एक उपाय के बारे में जानेंगे । यहां यह स्पष्ट करना बहुत जरूरी है कि यह जो उपाय मैं बता रहा हूं यह मेरे व्यक्तिगत सोच का परिणाम है यह आवश्यक नहीं है कि इन्हें अमल में लाया जाए बस मेरी एक कोशिश है और व्यक्तिगत रूप से मेरा मानना है कि ऐसा किया जा सकता है ।यदि सरकारों में यह करने की इच्छा हो क्योंकि यह उपाय सरकार के सहयोग से ही लागू हो सकते हैं । आज से हम बेरोजगारी की बहुत ही संवेदनशील समस्या पर बात करेंगे ।
मुझे यह बताने की जरूरत ही नहीं है कि आप बेरोजगारी की समस्या से अनभिज्ञ नहीं है इसलिए हम यह चर्चा नहीं करेंगे कि बेरोजगारी क्या है यह चर्चा हम आए दिन सुनते हैं TV, न्यूज़ समाचार पत्र सभी जगह आए दिन इस समस्या के बारे में लेख छपते हैं और पता नहीं कितने लेख छप चुके हम आम जनता पढ़ते भी हैं लेकिन बेचारी आम जनता के हाथ में कुछ नहीं है सिवाय मूकदर्शक बनने के हम अपनी परेशानियों की कसमसाहट को मन ही मन छुपाते रहते हैं क्योंकि हम जानते हैं कि हमें सुनने वाला कोई नहीं है । सरकारें सत्ता के नशे में चूर रहती है इसलिए हम यह नहीं जानेंगे कि बेरोजगारी क्या है बस मैं सिर्फ लोगों को यह बताना चाहता हूं कि अगर सरकारी ईमानदारी से इन उपायों पर सोचें तो अवश्य ही बेरोजगारी की समस्या मैं यह तो नहीं कहूंगा कि 100 प्रतिशत नही, लेकिन मैं यह मानता हूं कि 60 से 70% बेरोजगारी की समस्या दूर हो सकती है ।
इस ब्लॉग के माध्यम से मैं आपसे भी यह उम्मीद करूंगा की इसे अधिक से अधिक शेयर करें ताकि अधिक से अधिक लोग इन उपायों के बारे में जाने तो आज से बेरोजगारी की सीरीज के अंतर्गत हम पहले उपाय के बारे में चर्चा करेंगे ।
क्योंकि मैं भी इस समस्या से पीड़ित रहा हूं मैं भी एक शिक्षित बेरोजगार था काफी डिग्रियां ली काफी सर्टिफिकेट लिए काफी कोर्स किए लेकिन इसके बावजूद नौकरी तो नहीं मिली इसलिए अभी मैं ब्लॉग और YouTube के माध्यम से ही मेरा जीविकोपार्जन होता है । मैं आपसे भी गुजारिश करता हूं कि आप भी यह काम अवश्य करें , हो सकता है आपके पास समय की कमी हो आप पार्ट टाइम से कर सकते हैं सिर्फ धनार्जन के लिए नहीं आप अपने विचारों को जनता के सामने रख सकते हैं तो चलिए शुरू करते हैं बेरोजगारी का उपाय नंबर - 1
मित्रों जैसा की मैंने बताया हम बेरोजगारी क्या है इस बारे में बात नहीं करेंगे और करने की आवश्यकता भी नहीं है क्योंकि लगभग पूरे देश के युवा इस समस्या से पीड़ित है तो यह क्या समस्या है इसको जानने से कुछ नहीं होगा इसका मूल उद्देश्य यह है कि इसे कैसे दूर किया जाए ।
मित्रों मेरा यह मानना है कि एक ट्रैफिक सिपाही को हम लेते हैं या हम यह कहे कि ट्रैफिक समस्या को लें, आए दिन आज कल हमें अखबार और न्यूज़ TV में होने वाले एक्सीडेंट के बारे में सुनने को मिलता है यह एक गंभीर समस्या बनती जा रही है जैसे जैसे विकास के नाम पर सड़कें चौड़ी होती जा रही है मार्बल की तरह चिकनी होती जा रही है वैसे वैसे ही दुर्घटनाओं का ग्राफ बढ़ता जा रहा है । सुविधाएं बढ़ी हैं पर सुरक्षा कम हुई है ।
सुविधा के साथ सुरक्षा भी जरूरी है तो ट्रैफिक समस्या से निपटने के लिए सरकारों को आवश्यकता होती है ट्रैफिक पुलिस कर्मियों की और यह बात हम बहुत अच्छी तरह जानते हैं की ट्रैफिक पुलिस की बहुत भारी कमी है हमारे देश में । आप एक शहर में जाएं तो गिने-चुने बड़े स्थानों और चौराहों पर हमें ट्रैफिक कर्मी मिल जाते हैं इसके अतिरिक्त छोटी गलियों छोटी सड़कों अंदरूनी कॉलोनियां चौराहे कई मोड़ , खतरनाक मोड़, कई डेंजर जोन ऐसी बहुत सी स्थितियां शहर में होती है सड़कों पर कि आए दिन वहां पर एक्सीडेंट होते हैं । इसके अतिरिक्त लोग विशेषकर युवा ट्रैफिक नियमों को तोड़ने में पीछे नहीं रहते यहां तक कि युवा तो आजकल महंगी मोटरसाइकिल खरीद कर ऐसे गाड़ी को दौड़ाते हैं जैसे प्रथम आकर उन्हें नोबेल पुरस्कार प्राप्त होगा ।
चलिए वह एक अलग समस्या है बात करते हैं समस्या के हल के बारे में मैं मेरा व्यक्तिगत राय यह है कि एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी के पास क्या योग्यताएं होती है कि वह ट्रैफिक को नियंत्रित करता है या यूं कहें कि एक व्यक्ति के पास ऐसी कौन सी योग्यताएं होनी चाहिए कि वह ट्रैफिक को नियंत्रित कर सके तो जहां तक मुझे ध्यान है ट्रैफिक नियमों की जानकारी जरूरी है इसके अतिरिक्त शरीर से ठीक-ठाक हो शरीर में या शारीरिक रूप से स्वस्थ हो तो यह काम कोई भी युवा आसानी से कर सकता है । मुझे नहीं लगता कि यहां पर कोई बहुत ही ज्यादा ट्रेनिंग की आवश्यकता है आप जो ट्रैफिक नियमों के या जिन्होंने ट्रेनिंग ली है आप उनको बड़े चौराहों पर महत्वपूर्ण जगहों पर आप उनको तैनात कर सकते हैं , परंतु छोटे चौराहे छोटी सड़कें गली मोहल्ले या शहर के अंदरूनी हिस्से या हमने देखा है कि बड़े शहरों के बड़े शहरों का बहुत विकास हो गया है तो बाहर के जो मोहल्ले हैं जो मुख्य शहर से दूर हो चुके हैं वहां पर भी ट्रैफिक की बड़ी समस्या है तो नौजवानों को कुछ ट्रेनिंग दे दी जाए और सरकार द्वारा उन्हें अधिकृत कर दिया जाए कि वे ट्रैफिक को नियंत्रित कर सकते हैं ट्रैफिक को कंट्रोल कर सकते हैं तो मुझे नहीं लगता कि इसमें सरकारों को कोई परेशानी होगी क्यों वह परेशानी इसलिए नहीं होगी कि सरकार को यह जरूरत नहीं है कि वे उनकी तनख्वाह या सैलरी दे ।
मैं यह कहता हूं कि एक युवा अगर एक चौराहे पर सुबह से शाम 8 घंटे की ड्यूटी करता है तो कम से कम 10 आदमी या 15 आदमी तो वह अवश्य ही ऐसे पकड़ सकता है जिन्होंने ट्रैफिक नियम को तोड़ा हो या कोई दुर्घटना की हो या किसी भी प्रकार से ट्रैफिक में व्यवधान उत्पन्न किया हो । तो इस प्रकार 10 आदमी भी अगर हम मान कर चलें और प्रत्येक से ₹200 भी लिए जाएं तो ₹2000 प्रतिदिन के एकत्र होते हैं जिसमें से उस नौजवान को सरकार अपने हिसाब से 500 रुपए या ₹600 या जो भी उन्हें सही लगे वह नौजवान को देखकर अतिरिक्त बचा पैसा सरकार अपने पास रखें इस प्रकार सरकार की अतिरिक्त आय भी होगी और वह कोई अवैध भी नहीं होगी क्योंकि वह एक तरह से अपराधियों से लिया गया पैसा है ।
तो उन्हें सिर्फ जुर्माने का अधिकार रहे और कितना जुर्माना वह इकट्ठा होगा उसमें से सरकार अपना हिसाब रखें और उस नौजवान को भी अपना हिस्सा दे । मैं यह नहीं कहता कि इतनी तनख्वा होनी चाहिए सरकार अपने विवेक से आज के समय के अनुसार उन्हें अच्छी तनख्वाह पर भी रख सकती है तो इसमें मुझे नहीं लगता कहीं पर भी कोई बड़ी समस्या सरकार के लिए है बल्कि इससे सरकार की समस्या हल ही हो जाएगी । आप उनको कुछ ट्रेनिंग दे उनको कुछ रेगुलेशन नियम वगैरा समझाएं और उन्हें वैध तरीके से उन्हें अलग-अलग स्थानों पर अप्पोइन्ट कर दे ।
तो मित्रों यह एक मेरी राय है मेरा व्यक्तिगत मत है । हो सकता है आप इस बात से सहमत ना हो परंतु मेरी एक प्रार्थना है कि आप एक बार इस पर विचार जरूर कीजिए । मुझे नहीं लगता कि इस नियम को लागू करने में सरकारों को कोई परेशानी होगी ।
क्योंकि इससे सरकार पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ रहा दूसरा सरकार को अतिरिक्त आय हो रही है तो सरकारों के लिए तो यह लाभ की बात है तीसरा जो पहले से अपॉइंट है जो ट्रैफिक पुलिसकर्मी उनको भी से कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि उनका स्थान अलग है इनका स्थान अलग रहेगा ।
तो बेरोजगारी की सीरीज में आज हमने एक उपाय के बारे में जाना उम्मीद है आपको यह ब्लॉग अच्छा लगेगा ।
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और एजुकेशन के लिए यदि आप उत्कृष्ट वीडियो देखना चाहते हैं तो हमारे youTube चैनल WHAT WHEN WHERE पर देख सकते हैं ।
अगले ब्लॉग में एक नए बेरोजगारी के निराकरण के उपाय के साथ हाजिर होंगे ।
हमारे साथ अपना कीमती समय देने के लिए आपका बहुत-बहुत आभार बहुत-बहुत धन्यवाद ।
Accha sujhav hai sir
जवाब देंहटाएंNice, following
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